अनौपचारिक पत्र के उदहारण | informal letter example in hindi

 अनौपचारिक पत्र का अर्थ है जिस व्यक्ति को हम पत्र लिख रहे होते है उसको प्रत्यक्ष रूप से या चेहरे से जानते होते है | इस प्रकार के पत्र व्यक्तिगत पत्र की श्रेणी में आते हैं | इस प्रकार के पत्र में आत्मीय लगाव औपचारिक पत्र  की अपेक्षा ज्यादा होता है |

अनौपचारिक पत्र के उदहारण | informal letter example in hindi


1. अपने मित्र अथवा अपनी सखी को अपने जन्म-दिवस पर बधाई-पत्र लिखिए।
2. आपके मित्र को छात्रवृत्ति प्राप्त हुई है। उसे बधाई-पत्र लिखिए।
3. "समय का महत्व' बताते हुए छोटी बहन को पत्र लिखिए
4. खानपान संबंधी अच्छी आदतों हेतु छोटे भाई को पत्र लिखिए।
5. घर में होने वाले किसी समारोह का वर्णन करते हुए अपने मित्र को पत्र लिखिए।
6. जन्मदिन के अवसर पर सुंदर उपहार प्राप्त करने पर चाचाजी को धन्यवाद पत्र लिखिए।
7. पिताजी से रुपए मँगवाने हेतु पत्र लिखिए।

1. अपने मित्र अथवा अपनी सखी को अपने जन्म-दिवस पर बधाई-पत्र लिखिए।


56-एल, मॉडल टाउन
कोच्ची
31 मार्च, 20XX

प्रिय सखी नलिनी

सस्नेह नमस्कार!
आज ही तुम्हारा पत्र प्राप्त हुआ है। यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि तुम 4 अप्रैल को अपना 17वाँ जन्म-दिवस मना रही हो। इस अवसर पर तुमने मुझे भी आमंत्रित किया है इसके लिए अतीव धन्यवाद। प्रिय सखी, मैं इस शुभावसर पर अवश्य पहुँचती, लेकिन कुछ कारणों से उपस्थित होना संभव नहीं। मैं अपनी शुभकामनाएँ भेज रही हूँ। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे तुम्हें चिरायु प्रदान करें। तुम्हारा भावी जीवन स्वर्णिम आभा से मंडित हो। अगले वर्ष अवश्य आऊँगी। मैं अपनी ओर से एक छोटी-सी भेंट भेज रही हूँ, आशा है कि तुम्हें पसंद आएगी इस शुभावसर पर अपने माता-पिता को मेरी ओर से हार्दिक बधाई अवश्य देना।

तुम्हारी प्रिय सखी
मधु

2. आपके मित्र को छात्रवृत्ति प्राप्त हुई है। उसे बधाई-पत्र लिखिए।


512, चौक घंटाघर
भुवनेश्वर
19 जून, 20XX

प्रिय मित्र सुमन

सस्नेह नमस्कार!
दिल्ली बोर्ड की दशम कक्षा की परिणाम सूची में तुम्हारा नाम छात्रवृत्ति प्राप्त छात्रों की सूची में देखकर मुझे अतीव प्रसन्नता हुई। प्रिय मित्र, मुझे तुमसे यही आशा थी। तुमने परिश्रम भी तो बहुत किया था। तुमने सिद्ध कर दिया कि परिश्रम की बड़ी महिमा है। 85 प्रतिशत अंक प्राप्त करना कोई खाला जी का घर नहीं। अपनी इस शानदार सफलता पर मेरी ओर से हार्दिक बधाई स्वीकार करें। अपने माता-पिता को भी मेरी ओर से बधाई देना। ग्रीष्मावकाश में तुम्हारे पास आऊँगा। मिठाई तैयार रखना।

आपका अपना
विवेक शर्मा

3. "समय का महत्व' बताते हुए छोटी बहन को पत्र लिखिए


मकान न० 462
ताराचंद अपार्टमेंट
देहरादून

दिनांक- 05 दिसंबर, 2017

प्रिय अनुजा

सप्रेम,
मैं यहाँ कुशल हूँ आशा करता हूँ कि तुम भी सकुशल होगी। कल ही माता जी का पत्र मिला. पढ़कर यह जाना कि तुम आजकल मन लगाकर पढ़ नहीं रही हो, सारा दिन खेलती-घूमती रहती हो या टी.वी. और लैपटॉप पर अधिक समय व्यतीत करती हो। मैं तुम्हें यह बताना चाहता हूँ कि समय कभी लौटकर नहीं आता और यदि हम सही समय पर सही कार्य नहीं करते तो हमें पछताना पड़ता है। चाहकर भी हम बीता हुआ समय वापस नहीं पा सकते। इसलिए मैं तुम्हें यह सलाह देना चाहता हूँ कि एक समय-तालिका बनाओ उसके अनुसार खेल के समय खेल और पढ़ाई के समय पढ़ाई किया करो। तुम्हें आने वाले समय में डॉक्टर बनकर माता-पिता के सपने को साकार करना है। मेरी शुभकामनाएँ सदा तुम्हारे साथ हैं। आशा करता हूँ कि अब तुम समय का सदुपयोग करोगी।

माता जी को मेरी ओर से प्रणाम कहना।

तुम्हारा अग्रज
रहमान

4. खानपान संबंधी अच्छी आदतों हेतु छोटे भाई को पत्र लिखिए।


मकान न० 462
ताराचंद अपार्टमेंट
देहरादून

दिनंक- 05/07/2021

प्रिय अनुज

सप्रेम!
यहाँ पर सब कुशल-मंगल हैं। आशा करता हूँ कि तुम भी कुशलता से होंगे। मुझे यह मालूम हुआ है कि तुम आजकल ढंग से खाना नहीं खाते हो। जंक फूड (मैदे से बने पदार्थ) की ओर तुम्हारा रुझान बढ़ता जा रहा है। तुम्हें यह ज्ञात होना चाहिए कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। शरीर को स्वस्थ बनाने हेतु भरपूर मात्रा में प्रोटीन, वसा, विटामिन आदि की आवश्यकता होती है जो सही रूप से फल, सब्तियों व दालों आदि के सेवन से प्राप्त होते हैं। तुम्हें समयानुसार भोजन करना चाहिए। आवश्यकतानुसार दूध व फलों का सेवन करना चाहिए। बाजार की बनी वस्तुएँ व जंक फूड के आदी बनकर अपना स्वास्थ्य खराब मत करो। माताजी का कहना माना करो। वे तुम्हारी बहुत चिता करती है। अपनी पसंदानुसार एक आहार तालिका बनाओ और उस पर पूरी तरह से अमल करो। कुछ दिन में ही खानपान की आदतें सुधर जाएँगी। किसी भी बदलाव हेतु मनुष्य को आत्मकेंद्रण व दृढनिश्चय की आवश्यकता होती है। मुझे आशा है कि तुम अपनी खानपान की आदतों में सुधार अवश्य लाओगे। माता-पिता को मेरी ओर से प्रणाम व गुड्डू को प्यार।

तुम्हारा अग्रज
क.ख.ग.

5. घर में होने वाले किसी समारोह का वर्णन करते हुए अपने मित्र को पत्र लिखिए।


मकान नं.-511
वाराणसी कैंट

दिनांक-25 अप्रैल, 2017

प्रिय सात्त्विक,
सस्नेह!

मैं यहाँ पर कुशल हूँ। आशा करता हूँ तुम भी सकुशल होंगे। पिछले सप्ताह हमारे नए घर का 'गृहप्रवेश समारोह' था। मैंने तुम्हें निमंत्रण-पत्र भेजा था लेकिन तुम अपनी परीक्षाओं के कारण इस समारोह में शामिल नहीं हो सके। यह सचमुच एक यादगार समारोह था। पहले पंडित जी द्वारा विधि-विधान द्वारा पूजा हुई। फिर हवन का कार्यक्रम था। हवन के बाद प्रीतिमोज पर काफी लोग आमंत्रित थे। हमारे घर मुख्यमंत्री जी भी पधारे थे क्योंकि वे मेरे पिताजी के घनिष्ठ मित्र हैं। प्रीतिभोज के साथ-साथ संगीत का भी प्रबंध था। सभी बच्चे नाचने-गाने में मस्त थे। सभी को बहुत मजा आया। यदि तुम भी आते तो मुझे बहुत अच्छा लगता। परीक्षाएं समाप्त होने पर हमारा नया घर देखने जरूर आना।

अपने माता-पिता को मेरी तरफ से प्रणाम कहना व छोटी बहन को प्यार देना ।

तुम्हारा मित्र
आदित्य

6. जन्मदिन के अवसर पर सुंदर उपहार प्राप्त करने पर चाचाजी को धन्यवाद पत्र लिखिए।


512, चौक घंटाघर
भुवनेश्वर
19 जून, 20XX

आदरणीय चाचा जी

सादर प्रणाम!
आशा करता हूँ कि आप सकुशल होंगे कल ही आपका भेजा पार्सल/कोरियर मिला। जैसे ही उसे खोला तो सुंदर हाथ की घड़ी देखकर मैं उछल पड़ा। मुझे इस बात की इतनी खुशी हुई कि एक तो आप मेरा जन्मदिन कभी नहीं भूलते, दूसरे आपने कैसे जान लिया कि मैं इन दिनों घड़ी लेने की सोच ही रहा था। अब मैं सभी कार्य आसानी से समयानुसार कर सकूँगा आपके आशीर्वाद की यह भेंट मैं सदा सँभाल कर रखें इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूँ।

चाचीजी को मेरा प्रणाम कहिएगा व मोहिनी को प्यार।

आपका भतीजा
ऋषभ

7. पिताजी से रुपए मँगवाने हेतु पत्र लिखिए।


छात्रावास
दिल्ली माडर्न विद्यालय
प्रसाद नगर
नई दिल्ली।

दिनांक- 3.5.2017

आदरणीय पिताजी,

सादर प्रणाम।
आशा करता हूँ कि आप सकुशल होंगे। बहुत दिन से आपकी ओर से कोई पत्र नहीं आया। मैं भी अपनी परीक्षाओं में व्यस्त था इसलिए आपकी कुशलक्षेम न पूछ सका। मेरी इस बार की परीक्षाएँ बहुत अच्छी हुई हैं। मैंने यह पत्र आपको यह बताने के लिए लिखा है कि हमारे विद्यालय ने विद्यार्थियों को राजस्थान भ्रमण के लिए ले जाने का कार्यक्रम बनाया है। जो विद्यार्थी जाना चाहते हैं उनसे एक हजार रुपए व अभिभावकों की ओर से अनुमति पत्र मँगवाया है। मेरी भी जाने की अत्यधिक इच्छा है। मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि यदि आप मेरा जाना सही समझें तो जल्द ही एक हज़ार रुपए व अनुमति पत्र भेज दीजिए।

घर में माताजी को मेरा प्रणाम व सृष्टि को प्यार

आपका पुत्र
लक्ष्य

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.