चिट्ठियों की अनूठी दुनिया( निबन्ध) का सारांश, प्रश्नोत्तर और अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न कक्षा-8

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया पाठ का सार (सारांश)

'चिट्ठियों की अनूठी दुनिया' नामक निबंध के लेखक अरविंद कुमार सिंह हैं। इस निबंध में लेखक ने पत्रों के महत्त्व, उनकी उपयोगिता, तथा पत्रों से होने वाले लाभ का वर्णन बहुत ही सरल  शैली में किया है। निबंध की भाषा भी सहज एवं प्रवाहपूर्ण है। 


हर एक व्यक्ति अपने विचारों को या अपनी बातों को दूसरों तक पहुँचाने का प्रयत्न करता है। निकट व्यक्ति से बातचीत द्वारा विचारों का आदान-प्रदान होता है परंतु जिसके माध्यम से हम दूर बैठे व्यक्ति से विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, उसे 'पत्र' कहा जाता है। पत्रों की दुनिया अजीबो-गरीब है। पत्रो की उपयोगिता हमेशा से बनी रही है। पत्र जैसा संतोष फ़ोन या एस०एम०एस० कहाँ दे सकता है ? अर्थात् नहीं देता है। दुनिया का सारा साहित्य पत्रों पर केंद्रित है। पत्रों का भाव पूरे विश्व में एक-सा है, भले ही उसका स्वरूप अलग क्यों न हो। पत्रों के अलग-अलग नाम हैं, इन्हें उर्दू में 'खत', संस्कृत में 'पत्र', कन्नड़ में 'कागद', तेलगू में 'उत्तरम', 'जाबू' व और 'लेख' तथा तमिल में 'कडिद' कहा जाता है। पत्र यादों को सहेज कर रखते हैं। भारत में प्रतिदिन साढ़े चार करोड़ चिट्ठियाँ डाक में डाली जाती हैं। पत्रों की उत्सुकता सभी को होती है। अगर हम पत्रों की गहराई में जाएँ, तो हमें पता चल जाएगा कि विश्व में ऐसा कोई नहीं, जिसमें कभी पत्रों के लिए कोई उत्सुकता न रही हो। हमारे सैनिक तो पत्रों का जिस उत्सुकता से इंतजार करते हैं, उसकी कोई मिसाल नहीं है। आज देश में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है, जो अपने पुरखों की चिट्ठियों को सहेज कर रखे हुए हैं।


बड़े-बड़े लेखक, पत्रकार, उद्यमी, कवि, प्रशासक, संन्यासी या किसान-इनकी पत्र रचनाएँ अपने आप में अनुसंधान का विषय हैं। नेहरू के पत्र इंदिरा के लिए नहीं लिखे जाते, तो आज वे करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा-स्रोत न बन पाते। सभी महान हस्तियों की सबसे बड़ी यादगार या धरोहर उनके द्वारा लिखे गए पत्र ही हैं। भारत में इस श्रेणी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को सबसे आगे रखा जा सकता है। विश्व के लगभग सभी संग्रहालयों में जानी-मानी हस्तियों के पत्रों को अनूठे संकलन भी हैं। भारत में आजादी से पहले महासंग्राम के दिनों में अंग्रेजी अफसरों ने अपने परिवारजनों को जो पत्र लिखे, वे आगे चलकर बहुत महत्त्वपूर्ण पुस्तक का रूप प्राप्त कर गए। महात्मा गांधी के पास दुनिया भर से ढेर सारे पत्र केवल महात्मा गांधी - इंडिया नाम से लिखे आते थे। वे जहाँ भी रहते थे, उन तक वे पत्र पहुंच जाते थे। गांधीजी के पास देश-दुनिया से बड़ी संख्या में पत्र पहुंचे थे, परंतु पत्रों का जवाब देने के मामले में उनका कोई जोड़ नहीं था गांधीजी को जैसे ही कोई पत्र मिलता था, वे उसी समय उसका उत्तर लिख देते थे। वे अपने ही हाथों से अधिकतर पत्रों के जवाब देते थे। पत्रों का जवाब देते-देते जब उनका दाहिना हाथ दर्द करने लगता था, तब वे बाएँ हाथ से लिखने में जुट जाते थे। पत्रों के आधार पर बहुत-सी किताबें भी लिखी जा चुकी हैं।  

वास्तव में पत्र किसी दस्तावेज़ से कम नहीं हैं। पत्रों का आकर्षक संकलन कई रूपों में आपको देखने में मिल जाएगा। प्रेमचंद नए लेखकों को बहुत प्रेरक उत्तर देते थे इसी प्रकार नेहरू पत्र व्यवहार और गांधी को लिखे गए रवींद्रनाथ टैगोर के पत्र बहुत प्रेरक हैं।  सभी सरकारी विभागों में सबसे अच्छा विभाग डाक-विभाग ही है। यह लोगों को जोड़ने का काम करता है। घर-घर तक इसकी पहुंच है। शहरी इलाकों में आलीशान हवेलियाँ हों या फिर झोपड़ियों में रह रहे लोग, दुर्गम जंगलों से घिरे गाँव हों या फिर बर्फबारी के बीच जी रहे पहाड़ों के लोग अथवा अन्य क्षेत्रों में रहने वाले लोग आज भी पत्रों का बेसब्री से इंतजार करते हैं। गाँवों या गरीबों की बस्तियों में चिट्ठी या मनीऑर्डर लेकर पहुँचने वाला डाकिया देवदूत के रूप में देखा जाता है।
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चिट्ठियों की अनूठी दुनिया पाठ के प्रश्न उत्तर

पाठ से

1. पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश क्यों नहीं दे सकता?

उत्तर- पत्रों से राजनीति, साहित्य और कला के स्वरूप की पहचान होती है। पत्र-लेखन लेखन की एक विशिष्ट कला है। पत्र से लोग अपनी यादों को सहेज कर सुरक्षित रखते हैं। फोन या एसएमएस पत्र की प्रासंगिकता को कभी भी समाप्त नहीं कर सकते। पत्रों के माध्यम से कही गई बात आत्मीयतापूर्ण होती है। जबकि फोन या एसएमएस द्वारा कही गई बात मात्र औपचारिक संदेश होते हैं।

2. पत्र को खत, कागद, उत्तरम्, जाबू, लेख, कडिद, पाती, चिट्ठी इत्यादि कहा जाता है। इन शब्दों से संबंधित भाषाओं के नाम बताइए।

उत्तर- पत्र को उर्दू में खत, संस्कृत में पत्र, कन्नड़ में कागज, तेलुगु में उत्तरम, जाबू, और लेख तथा तमिल में कडिद कहा जाता है।

3. पत्र लेखन की कला के विकास के लिए क्या-क्या प्रयास हुए? लिखिए।

उत्तर- हजारों सालों से  पत्र-लेखन की कला का विकास उत्तरोत्तर बढ़ता ही जा रहा है। पहले के समय में पत्र हरकारे, तीव्रगामी घोड़े, कबूतर आदि माध्यम से भेजे जाते थे। बाद में बिजली और रेल के आविष्कार से टेलीफोन, वायरलेस, रेडियो आदि आधुनिक उपकरणों के रूप में पत्रों के क्षेत्र में विकास हुआ। पत्र-लेखन के विकास के लिए विद्यालय पाठ्यक्रम में पत्र लेखन को विषय के रूप में भी सम्मिलित किया गया है। विश्व डाक संघ ने बच्चों में पत्र-लेखन को बढ़ावा देने के लिए तरह-तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित करने का संकल्प लिया ।

4. पत्र धरोहर हो सकते हैं लेकिन एसएमएस क्यों नहीं? तर्क सहित अपना विचार लिखिए।

उत्तर- पत्र हमारे लिए धरोहर हैं। पत्रों में राजनीति, साहित्य, कला और संस्कृति के तत्कालीन साक्षात दर्शन होते हैं। जबकि एस.एम.एस. या फोन में ऐसा कुछ नहीं है। उदाहरण के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पुत्री इंदिरा के नाम जो पत्र लिखें वह लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत बने और वह पत्र आज भी सुरक्षित है। इसके विपरीत आज फोन पर की गई बातचीत या एस.एम.एस. को लोग जल्दी ही भूल जाते हैं। महात्मा गांधी जी द्वारा लिखे गए पत्र आज भी संग्रहालय में स्पष्ट देखे जा सकते हैं।

5. क्या चिट्ठियों की जगह कभी फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ले सकते हैं?

उत्तर- आजकल फैक्स, ईमेल, टेलीफोन तथा मोबाइल पत्र-लेखन को प्रभावित किए है परंतु आधुनिक संचार-साधन पत्रों का स्थान नहीं ले पाए हैं और न कभी ले पाएंगे। आज भी दुर्गम स्थानों पर लोग पत्रों का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

पाठ से आगे


1  किसी के लिए बिना टिकट सादे लिफ़ाफ़े पर सही पता लिखकर पत्र बैरंग भेजने पर कौन-सी कठिनाई आ सकती है? पता कीजिए।

उत्तर- बिना टिकट वाले पत्र प्राप्तकर्ता को तभी मिलते हैं जब वह डाकिए को उस टिकट का मूल्य अदा कर देता है। मुल्य न दिए जाने पर डाकिया उसे पत्र नहीं देगा और पत्र न मिलने पर प्राप्तकर्ता आवश्यक सूचना से वंचित हो जाएगा।

2. पिन कोड भी संख्याओं में लिखा गया एक पता है, कैसे?

उत्तर- 6 अंकों में लिखा पिन कोड एक पता है क्योंकि पिन कोड का पहला अंक भारत क्षेत्र को दर्शाता है, दुसरा अंक उपक्षेत्र को दर्शाता है, तीसरा अंक छंटनी क्षेत्र के कोड को दर्शाता है जबकि अंतिम 3 अंक सुपुर्दगी करने वाले डाकखाने का प्रतिनिधित्व करते है।

3. ऐसा क्यों होता था कि महात्मा गांधी को दुनिया भर से पत्र 'महात्मा गांधी-इंडिया पता लिखकर आते थे?

उत्तर- महात्मा गांधी जी विश्व प्रसिद्ध व्यक्ति थे। सभी को उनका पूरा पता मालूम था। भारत का प्रत्येक नागरिक उनको और उनके पते को जानता था इसलिए डाकघर वाले महात्मा गांधी जी का नाम पढ़कर पत्र को गंतव्य स्थान तक पहुंचा देते थे।

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया पाठ का अनुमान और कल्पना

1. रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता 'भगवान के डाकिए' आपकी पाठ्यपुस्तक में है। उसके आधार पर पक्षी और बादल को डाकिए की भांति मानकर अपनी कल्पना से लेख लिखिए।

उत्तर- भगवान के डाकिए रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखी गई श्रेष्ठ रचना है। दिनकर जी ने बादल और पक्षी को भगवान के डाकिए के रूप में चित्रित किया है। बादल और पक्षी देखने में और वास्तव में दो अलग-अलग शब्द हैं। लेकिन दोनों में पूर्ण आंतरिक समानता है क्योंकि बादल और पक्षी दोनों एक देश से दूसरे देश में आते-जाते रहते हैं। इन्हें प्रकृति का संदेशवाहक भी कहा गया है। यह अलग बात है कि इनके द्वारा लाए गए संदेश को न हम पढ़ सकते हैं और न हम समझ सकते हैं लेकिन पेड़, पौधे, पहाड़ और पानी अपने-अपने तरीके से उसके संदेश को सुनते हैं और समझते है।

2, संस्कृत साहित्य के महाकवि कालिदास ने बादल को संदेशवाहक बनाकर 'मेघदूत' नाम का काव्य लिखा है। 'मेघदूत' के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।

उत्तर- मेघदूत महाकवि कालिदास द्वारा रचित खंडकाव्य है। इसमें यक्ष और यक्षिणी की प्रेम कथा है। यक्ष अलकापुरी से निष्कासित होने पर रामगिरि पर्वत पर अपना निवास बनाता है। वर्षा ऋतु में उसे अपनी प्रेमिका यक्षिणी की याद सताती है। वह जानता है कि अब मैं अलकापुर नहीं पहुंच पाऊंगा इसलिए वह बादल को रामगिरी से अलकापुर तक के विस्तृत रास्ते को बताकर अपने प्रेम संदेश को यक्षिणी को देने के लिए कहता है।

3. पक्षी को संदेशवाहक बनाकर अनेक कविताएँ एवं गीत लिखे गए हैं। एक गीत है-'जा जा रे कागा विदेशवा, मेरे पिया से कहियो संदेशवा'। इस तरह के तीन गीतों का संग्रह कीजिए। प्रशिक्षित पक्षी के गले में पत्र बाँधकर निर्धारित स्थान तक पत्र भेजने का उल्लेख मिलता है। मान लीजिए आपको एक पक्षी को संदेशवाहक बनाकर पत्र भेजना हो तो आप वह पत्र किसे भेजना चाहेंगे और उसमें क्या लिखना चाहेंगे।

उत्तर- मेरे पिताजी देश के सीमा पर तैनात एक सिपाही हैं अतः मैं पक्षी के गले में पत्र बांधकरकर पिताजी को भेजना चाहूंगा। मैं उस पत्र के माध्यम से उन्हें घर की सारी जानकारी दूंगा। मैं यह भी बताऊंगा कि दसवीं की बोर्ड परीक्षा अच्छे अंकों से मैनें पास कर लिया है।

4. केवल पढ़ने के लिए दी गई रामदरश मिश्र की कविता 'चिट्ठियाँ' को ध्यानपूर्वक पढ़िए और विचार कीजिए कि क्या यह कविता केवल लेटर बॉक्स में पड़ी निर्धारित पते पर जाने के लिए तैयार चिट्ठियों के बारे में है? या रेल के डिब्बे में बैठी सवारी भी उन्हीं चिट्ठियों की तरह हैं जिनके पास उनके गंतव्य तक का टिकट है। पत्र के पते की तरह और क्या विद्यालय भी एक लेटर बाक्स की भाँति नहीं है जहाँ से उत्तीर्ण होकर विद्यार्थी अनेक क्षेत्रों में चले जाते हैं? अपनी कल्पना को पंख लगाइए और मुक्त मन से इस विषय में विचार-विमर्श कीजिए।

उत्तर- रामदरश मिश्र द्वारा रचित कविता चिट्ठियां आज के मानव पर तीखा व्यंग है। यह कविता आकार में तो छोटी है लेकिन अपने साथ बहुत से गूढ़ रहस्यों को लिए हुए है। कवि ने पत्रों की तुलना मानव से की है। लेटर बॉक्स में पत्र सबके साथ  रहते हैं अर्थात किसी के दुख के पत्र होते हैं किसी के सुख के पत्र होते हैं वह पत्र आपस में बातें नहीं करते एक-दूसरे की भावनाओं को वे नहीं समझते। ठीक  इसी प्रकार आज का मानव भी अपने-अपने में मगन है। यह कविता रेल में सफर करने वाले लोगों तथा विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर भी बिल्कुल ठीक बैठती है। चिट्ठियों की तरह विद्यार्थी भी अलग-अलग स्थानों से आते हैं और विद्या अर्जन करने के पश्चात अपने-अपने स्थान पर चले जाते हैं।

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया पाठ के भाषा की बात


1-किसी प्रयोजन विशेष से संबंधित शब्दों के साथ पत्र शब्द जोड़ने से कुछ नए शब्द बनते हैं, जैसे-प्रशस्ति पत्र, समाचार पत्र। आप भी पत्र के योग से बननेवाले दस शब्द लिखिए।

उत्तर- पारिवारिक पत्र, प्रमाण पत्र, प्रेम , प्रार्थना पत्र, शोक पत्र सूचना पत्र, शिकायती पत्र, आवेदन पत्र, निमंत्रण पत्र।

2. व्यापारिक शब्द व्यापार के साथ 'इक' प्रत्यय के योग से बना है इक प्रत्यय के योग से बननेवाले शब्दों को अपनी पाठ्यपुस्तक से खोजकर लिखिए।

उत्तर- दैनिक= दिन+इक, सामाजिक= समाज+इक, व्यापारिक= व्यापार+इक, आर्थिक= अर्थ+इक, व्यावहारिक= +इक।

3-दो स्वरों के मेल से होनेवाले परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं; जैसे-रवीन्द्र = रवि + इन्द्र। इस संधि में इ + इ = ई हुई है। इसे दीर्घ संधि कहते हैं। दीर्घ स्वर संधि के और उदाहरण खोजकर लिखिए। मुख्य रूप से स्वर संधियाँ चार प्रकार की मानी गई हैं-दीर्घ, गुण, वृद्धि और यणा ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ के बाद ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ. आ आए तो ये आपस में मिलकर क्रमशः दीर्घ आ, ई, ऊ हो जाते हैं. कारण इस संधि को दीर्घ संधि कहते हैं; जैसे-संग्रह + आलय = संग्रहालय, महा + आत्मा = महात्मा। इस प्रकार के कम-से-कम दस उदाहरण खोजकर लिखिए और अपनी शिक्षिका/शिक्षक को दिखाइए।

उत्तर
मृगेंद्र= मृग+इंद्र, 
देवेंद्र= देव+इंद्र, 
महोदय= महा+उदय, 
पुरुषार्थ= पुरुष+अर्थ, 
देवेश= देव+ईश, 
गिरीश= गिरी+ईश,
परमेश्वर= परम+ईश, 
यद्यपि= यदि+अपि, 
स्वागत= सु+आगत, 
महेंद्र= महा+इंद्र, 
नरेंद्र= नर+इंद्र, 
सुरेश= सुर+ईश।

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया पाठ के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न- किस तरह के पत्रों को बहुमूल्य धरोहर के रूप में देखा जाता है और क्यों? स्पष्ट कीजिए ।
प्रश्न- वर्तमान समय में डाक विभाग के दायित्व किस तरह से परिवर्तित हो रहे हैं?
प्रश्न- लेखक ने डाकिए को देवदूत क्यों कहा है?
प्रश्न- लेखक ने पत्रों को दस्तावेज क्यों कहा है?
प्रश्न- लेखक ने डाक विभाग को गुडविल की संज्ञा से क्यों संबोधित किया है?

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