क्या निराश हुआ जाए(निबन्ध) का सारांश, प्रश्नोत्तर और अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न कक्षा-8

क्या निरास हुआ जाए

 

आपके विचर से

1. लेखक ने स्वीकार किया है कि लोगों ने उन्हें भी धोखा दिया है फिर भी वह निराश नहीं है। आपके विचार से इस बात का क्या कारण हो सकता है?


उत्तर- यह सही है कि लेखक ने स्वयं लोगों से धोखा खाया है, ठगा गया है। परंतु वह लोगों के दुर्व्यवहार या दुर्भावनाओं को कभी याद नहीं रखता है। वह जीवन के प्रति सकारात्मक रहता है और साथ-साथ आशावादी दृष्टिकोण को बनाए रखता है। वह अनुभव करता है कि दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नहीं है। लोगों में अब भी मानवीयता के गुण हैं वह स्वयं भगवान से शक्ति पाने की प्रार्थना करता है। धोखा खाने, ठगा जाने पर भी वह भगवान के अस्तित्व को स्वीकार करता है जिससे उसे आत्मिक शक्ति मिले।

2. समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और टेलीविज़न पर आपने ऐसी अनेक घटनाएँ देखी सुनी होंगी जिनमें लोगों ने बिना किसी लालच के दूसरों की सहायता की हो या ईमानदारी से काम किया हो। ऐसे समाचार तथा लेख एकत्रित करें और कम से कम दो घटनाओं पर अपनी टिप्पणी लिखें।

उत्तर- विद्यार्थी स्वयं करें

3. लेखक ने अपने जीवन की दो घटनाओं में रेलवे के टिकट बाबू और बस कंडक्टर की अच्छाई और ईमानदारी की बात बताई है। आप भी अपने या अपने किसी परिचित के साथ हुई किसी घटना के बारे में बताइए जिसमें किसी ने बिना किसी स्वार्थ के भलाई, ईमानदारी और अच्छाई के कार्य किए हो।

उत्तर- विद्यार्थी स्वयं करें

पर्दाफाश


1. दोषों का पर्दाफ़ाश करना कब बुरा रूप ले सकता है?

उत्तर- दोष कोई भी हो उसका पर्दाफाश होना आवश्यक है। लेकिन उसके उजागर होने पर लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा इस बात पर भी विचार करना चाहिए। कुछ लोग ऐसे हैं जो किसी के दोषों को बताते हुए उसमें आनंद लेते हैं, जो समाज के हित में नहीं है और इस परिस्थिति में दूसरों का पर्दाफाश करना बुरा रूप ले लेता है।

2. आजकल के बहुत से समाचार पत्र या समाचार चैनल 'दोषों का पर्दाफ़ाश कर रहे हैं। इस प्रकार के समाचारों और कार्यक्रमों की सार्थकता पर तर्क सहित विचार लिखिए?

उत्तर- समाचार पत्रों और समाचार चैनलों के द्वारा दोषों का पर्दाफाश करने का मुख्य उद्देश्य समाज को जागृत करना और समाज को एक नई दिशा देना है। जब व्यक्ति जागृत हो जाएगा तो वह गुण-दोष की परिभाषा को अच्छी तरह समझ जाएगा। गुण दोषों की परिभाषा समझाने का कार्य समाचार पत्र या समाचार चैनल ही करते हैं समाज में यदि किसी निम्न वर्ग का शोषण हो रहा है या किसी व्यक्ति को न्याय नहीं मिल पा रहा है तो ये चैनल उनकी समस्याओं को लोगों के सामने दिखाते हैं और उसे व्याख्या करते है। इस तरह से देखने वाले के अंदर मानवीय संवेदना का विकास होता है और वह उसे उसकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास करता है।
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कारण बताइए


निम्नलिखित के संभावित परिणाम क्या-क्या हो सकते हैं? आपस में चर्चा कीजिए जैसे-"ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है।" परिणाम-भ्रष्टाचार बढ़ेगा।

1. "सच्चाई केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से पडी है।"
उत्तर- असत्य का प्रचार बढ़ेगा।

2. "झूठ और फरेब का रोजगार करनेवाले फल-फूल रहे हैं।"
उत्तर- असत्य और छल-कपट कि विजय होगी।

3. "हर आदमी दोषी अधिक दिख रहा है, गुणी कम"
उत्तर- सामाजिक बुराई बढ़ेगी।

दो लेखक और बस यात्रा


आपने इस लेख में एक बस की यात्रा के बारे में पढ़ा। इससे पहले भी आप एक बस यात्रा के बारे में पढ़ चुके हैं। यदि दोनों बस-यात्राओं के लेखक आपस में मिलते तो एक-दूसरे को कौन-कौन सी बातें बताते? अपनी कल्पना से उनकी बातचीत लिखिए।

उत्तर- विद्यार्थी स्वयं करें

सार्थक शीर्षक


1. लेखक ने लेख का शीर्षक 'क्या निराश हुआ जाए' क्यों रखा होगा? क्या आप इससे भी बेहतर शीर्षक सुझा सकते हैं?

उत्तर- लेखक ने पाठ में समाज में व्याप्त बुराइयों का वर्णन करते हुए इस बात पर बल दिया है कि हमें बुराइयों से बचना चाहिए बुराइयों को अपने पास भटकने नहीं देना चाहिए लेखक ने समाज में व्याप्त अच्छे पक्ष को भी उद्घाटित किया है और बुरे पक्ष को भी बताया है ताकि लोगों में निराशा की भावना न उत्पन्न हो सके। अतः इस लेख का शीर्षक बुराई पर अच्छाई की विजय उपयुक्त है।

2. यदि 'क्या निराश हुआ जाए' के बाद कोई विराम चिह्न लगाने के लिए कहा जाए तो आप दिए गए चिह्नों में से कौन-सा चिह्न लगाएँगे? अपने चुनाव का कारण भी बताइए। -, । . !?. ;


उत्तर- क्या निराश हुआ जाए पाठ के लिए हम विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का इस्तेमाल करेंगे क्योंकि इस पाठ में लेखक ने देश की समस्याओं पर लोगों का ध्यान आकृष्ट कर निराश न होने को कहता है। वह कहता है कि प्रत्येक समस्याओं का निवारण संभव है। अगर आप निराश होकर बैठ जाओगे तो आपकी समस्या दूर नहीं होगी बल्कि वह बढ़ती ही जाएगी। निराश होकर बैठ जाना हैरानी की बात है इसीलिए मैं यहां विस्मयादिबोधक  चिह्न लगाऊंगा ।

*"आदर्शों की बातें करना तो बहुत आसान है पर उन पर चलना बहुत कठिन है।" क्या आप इस बात से सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर- आदर्शों की बातें करना तो बहुत आसान है, पर उन पर चलना बहुत कठिन है इस मत से मैं  असहमत हूं क्योंकि मनुष्य निश्चित सिद्धांतों पर चलकर ही मनुष्यता के या मानवता के वास्तविक शिखर को प्राप्त करता है। मनुष्य अगर दृढ़ होकर कोई भी संकल्प कर ले तो उसे सफलता अवश्य मिलेगी।

सपनों का भारत


"हमारे महान मनीषियों के सपनों का भारत है और रहेगा।"
1- विचार से हमारे महान विद्वानों ने किस तरह के भारत के सपने देखे थे? लिखिए।

उत्तर- भारत ऋषि-मुनियों की भूमि कहा जाता है। प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों द्वारा बताए गए मार्गों का पालन आज भी हो रहा है और इस मार्ग पर चलकर हमारे समाज का विकास दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। हमारे विचार से विद्वानों ने अखंड भारत और समृद्ध भारत के सपने देखे थे जिसे वास्तविक रूप में लाने का कर्तव्य हम सबका है। वे ऐसे भारत का निर्माण करना चाहते थे जहां पर जातिवाद, छुआछूत इत्यादि सामाजिक बुराइयों का नामोनिशान न हो अर्थात प्रत्येक लोग एक-दूसरे के साथ प्रेम और सौहार्द की भावना से रहे।

2- आपके सपनों का भारत कैसा होना चाहिए? लिखिए।

उत्तर- मेरे सपनों का भारत सत्यवादी, अहिंसावादी, और विकास पथ में सभी देशों से आगे होना चाहिए। मेरे सपनों का भारत अखंड और समृद्धशाली होना चाहिए। भारत के प्रत्येक नागरिक में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। भारत का प्रत्येक नागरिक आत्मनिर्भर होना होना चाहिए। देश के विकास में स्त्रियों की भागीदारी पर पूर्ण जोर देना चाहिए। मेरा भारत कृषक प्रधान देश है अतः किसानों के योगदान को समझते हुए उनकी सभी सुविधाओं का ध्यान रखना चाहिए। मेरे सपनों का भारत सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की भावना से प्रेरित होना चाहिए।

भाषा की बात


1- दो शब्दों के मिलने से समास बनता है समास का एक प्रकार है-द्वंद्व समास। इसमें दोनों शब्द प्रधान होते हैं। जब दोनों भाग प्रधान होंगे तो एक-दूसरे में द्वंद्व (स्पर्धा, होड़) की संभावना होती है। कोई किसी से पीछे रहना नहीं चाहता, जैसे-चरम और परम = चरम-परम, भीरु और बेबस = भीरु-बेबस। दिन और रात = दिन-रात। 'और' के साथ आए शब्दों के जोड़े को 'और' हटाकर (-) योजक चिह्न भी लगाया जाता है। कभी-कभी एक साथ भी लिखा जाता है। द्वंद्व समास के बारह उदाहरण ढूँढकर लिखिए।

उत्तर-
1-आरोप-प्रत्यारोप, 2-फल-फूल, 3-सुख-सुविधा, 4-काम-क्रोध, 5-कायदे-कानून, 6-बाहर-भीतर, 7-भिरू-बेबस, 8-भोले-भाले, 9-ठगी-वंचना, 10-दया-माया, 11-झूठ-फरेब, 12-लोभ-मोह।

2. पाठ से तीनों प्रकार की संज्ञाओं के उदाहरण खोजकर लिखिए।

उत्तर-
व्यक्तिवाचक संज्ञाएं- भारत, रविंद्र नाथ ठाकुर, मदन मोहन मालवीय, महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, इत्यादि।

जातिवाचक संज्ञाए- आदमी, व्यक्ति, आर्य, द्रविड़, महिला, कंडक्टर, बच्चे, ड्राइवर, डाकू, पत्नी, इत्यादि।

भाववाचक संज्ञाएं- दोस्त, क्रोध, धोखा, पाप, सच्चाई, वंचना, मनुष्यता, विनम्रता, बुराई, इत्यादि।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न जिसे विद्यार्थी स्वयं हल करें


प्रश्न- बुराई में रस लेना बुरी बात है। भाव स्पष्ट कीजिए ।

प्रश्न- लोगों पर लेखक के क्या करने का विशेष प्रभाव नहीं पड़ा?

प्रश्न- पाठ के अनुसार वर्तमान समय में किनका शोषण हो रहा है?

प्रश्न- लेखक के अनुसार आज का भारत क्या भूल गया है?

प्रश्न- ईमानदारी और सच्चाई की कैसी दशा हो रही ?

प्रश्न- आज किस तरह के लोग अधिक फल-फूल रहे हैं?

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